अमेरिकी जांच के घेरे में 10,000 विदेशी छात्र

अमेरिकी आव्रजन और सीमा शुल्क प्रवर्तन (ICE) ने ‘ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग’ (OPT) कार्यक्रम के भीतर बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी का भंडाफोड़ किया है। इस कार्रवाई के तहत लगभग 10,000 विदेशी छात्रों को जांच के दायरे में लिया गया है। अधिकारियों का आरोप है कि इन छात्रों ने अपनी कानूनी F-1 वीजा स्थिति बनाए रखने के लिए “फर्जी कंपनियों” और “शेल कॉरपोरेशन” का सहारा लिया है।
यह कार्रवाई वर्तमान प्रशासन की सख्त आव्रजन नीतियों का हिस्सा है, जिसे 2025 में पारित “वन बिग ब्यूटीफुल बिल एक्ट” (OBBBA) के तहत मजबूती मिली है। इस कानून ने ICE को 170 बिलियन डॉलर का भारी-भरकम बजट प्रदान किया है, जिसका उद्देश्य वीजा नियमों का उल्लंघन करने वालों पर नकेल कसना है। जांच में पाया गया है कि कई छात्र केवल कागजों पर काम दिखा रहे थे, जबकि वास्तव में वहां कोई कार्यालय या व्यवसाय मौजूद नहीं था।
धोखाधड़ी का तरीका: “खाली दफ्तर और बंद दरवाजे”
ICE की जांच के दौरान चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। अधिकारियों ने उन पतों का दौरा किया जहां सैकड़ों छात्र कार्यरत होने का दावा कर रहे थे, लेकिन वहां केवल खाली इमारतें और बंद दरवाजे मिले। इसे “कोऑर्डिनेटेड एम्प्लॉयर क्लस्टर्स” कहा जा रहा है, जहां कई संदिग्ध कंपनियां एक ही पते से संचालित हो रही थीं।
कार्यवाहक ICE निदेशक टॉड लियोन ने इस कार्यक्रम को “धोखाधड़ी का चुंबकीय केंद्र” बताया। उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “OPT कार्यक्रम अब एक अनियंत्रित ‘गेस्ट वर्कर पाइपलाइन’ में बदल गया है। हमने हजारों ऐसे छात्रों की पहचान की है जो उन नियोक्ताओं के लिए काम कर रहे हैं जिन्होंने गृह सुरक्षा विभाग (DHS) को खुलेआम गलत जानकारी दी। जो लोग इस धोखाधड़ी में शामिल हैं, उन्हें मेरा सुझाव है कि वे तुरंत आत्मसमर्पण कर दें ताकि गंभीर आपराधिक और आव्रजन परिणामों से बचा जा सके।”
जांचकर्ताओं के अनुसार, टेक्सास में एक साइट विजिट के दौरान पाया गया कि एक कंपनी ने केवल तीन छात्रों के होने का दावा किया था, जबकि रिकॉर्ड में वहां 500 विदेशी छात्र कार्यरत दिखाए गए थे। इन कंपनियों के वित्तीय लेन-देन में भी कई अनियमितताएं पाई गई हैं।
भारतीय छात्रों पर गहराता संकट
चूंकि भारतीय छात्र अमेरिका में OPT और STEM-OPT कार्यक्रमों का उपयोग करने वाले सबसे बड़े समूहों में से एक हैं, इसलिए इस जांच का सबसे बड़ा असर उन्हीं पर पड़ा है। कई छात्र जो अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद H-1B वीजा की प्रतीक्षा कर रहे थे, अब निर्वासन (deportation) के खतरे का सामना कर रहे हैं।
इमिग्रेशन वकीलों ने छात्रों को सलाह दी है कि वे अपने रोजगार के सभी रिकॉर्ड और कागजात पूरी तरह से तैयार और सत्यापित रखें। 2026 के प्रस्तावित “एंड H-1B वीजा एब्यूज एक्ट” ने इस चिंता को और बढ़ा दिया है, क्योंकि इसमें OPT कार्यक्रम को पूरी तरह समाप्त करने का प्रस्ताव है।
अमेरिकी विश्वविद्यालयों की वित्तीय चुनौतियां
वीजा नियमों में इस सख्ती और लगातार हो रही जांच का असर अब अमेरिकी विश्वविद्यालयों की अर्थव्यवस्था पर भी दिखने लगा है। 12 मई 2026 को जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, नए विदेशी छात्रों के नामांकन में 20% की गिरावट दर्ज की गई है।
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राजस्व का नुकसान: ‘नाफ्सा’ (NAFSA) के अनुसार, इस गिरावट से विश्वविद्यालयों को 1 बिलियन डॉलर से अधिक का नुकसान हो सकता है।
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बजट में कटौती: नामांकन कम होने के कारण कई विश्वविद्यालयों ने नई नियुक्तियों पर रोक लगा दी है और अधिकारियों के वेतन में कटौती की है।
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विकल्पों की तलाश: अमेरिका में बढ़ती सख्ती के कारण छात्र अब कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और एशिया-प्रशांत क्षेत्र के विश्वविद्यालयों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
क्या है OPT कार्यक्रम?
बुश प्रशासन के दौरान शुरू और ओबामा प्रशासन में विस्तारित ‘ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग’ (OPT) कार्यक्रम के तहत F-1 वीजा वाले छात्रों को स्नातक होने के बाद 12 महीने तक अपने अध्ययन के क्षेत्र में काम करने की अनुमति मिलती है। विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) के छात्रों को 24 महीने का अतिरिक्त विस्तार मिलता है, जिससे वे कुल तीन साल तक काम कर सकते हैं। इसका उद्देश्य छात्रों को व्यावहारिक अनुभव देना था, लेकिन अब इस पर ‘सस्ते श्रम’ और ‘अवैध विस्तार’ का जरिया बनने के आरोप लग रहे हैं।




