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भारत की व्यापारिक जीत पर

ढाका/वाशिंगटन — दक्षिण एशिया के भू-राजनीतिक और आर्थिक परिदृश्य में हलचल मचाते हुए, बांग्लादेश की अंतरिम सरकार 9 फरवरी, 2026 को संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ एक अत्यंत महत्वपूर्ण और गोपनीय व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर करने जा रही है। 12 फरवरी को होने वाले राष्ट्र के ऐतिहासिक आम चुनावों से मात्र 72 घंटे पहले किए जा रहे इस सौदे के समय (timing) ने देश के भीतर तीखी आलोचना और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गहरी उत्सुकता पैदा कर दी है।

यह कूटनीतिक दौड़ नई दिल्ली के लिए एक ऐतिहासिक व्यापारिक सफलता के ठीक बाद शुरू हुई है। महज कुछ दिन पहले ही, 3 फरवरी 2026 को भारत और अमेरिका ने एक द्विपक्षीय समझौते को अंतिम रूप दिया, जिसने भारतीय सामानों पर आयात शुल्क (tariffs) को 50% के भारी-भरकम “पारस्परिक टैरिफ” (reciprocal tariff) से घटाकर 18% कर दिया है। अपने बड़े पड़ोसी के हाथों बाजार हिस्सेदारी खोने के डर से, मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली ढाका की अंतरिम सरकार अब अमेरिकी बाजार में अपनी प्रतिस्पर्धात्मकता बनाए रखने के लिए अपने टैरिफ को 15% तक नीचे लाने की कोशिश कर रही है।

‘गुप्त’ खंड: एनडीए (NDA) की गोपनीयता

इस व्यापार सौदे को अन्य मानक अंतरराष्ट्रीय समझौतों से जो अलग बनाता है, वह है जून 2025 में हस्ताक्षरित एक सख्त गैर-प्रकटीकरण समझौता (NDA)। बांग्लादेश के प्रमुख समाचार पत्र प्रथम आलो और वाणिज्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों की रिपोर्टों के अनुसार, इस सौदे की विशिष्ट शर्तें, दी गई रियायतें और बदले में निभाई जाने वाली प्रतिबद्धताएं अभी भी ‘क्लासिफाइड’ यानी गोपनीय हैं।

उद्योग जगत के हितधारक पारदर्शिता की इस कमी से विशेष रूप से चिंतित हैं। तैयार परिधान (RMG) क्षेत्र, जो अमेरिका को होने वाले बांग्लादेश के कुल निर्यात का लगभग 90% हिस्सा है और 2023 में जिसका मूल्य लगभग 38 बिलियन डॉलर आंका गया था, देश की अर्थव्यवस्था की असली रीढ़ है। व्यापारिक नेताओं का तर्क है कि इतना महत्वपूर्ण और दूरगामी परिणाम वाला समझौता किसी अंतरिम प्रशासन द्वारा अपने कार्यकाल के अंतिम घंटों में नहीं किया जाना चाहिए।

“मैं चुनाव से केवल तीन दिन पहले इस समझौते पर हस्ताक्षर होते देख हैरान था। मेरा अब भी मानना है कि यह चुनाव के बाद किया जाना चाहिए था क्योंकि हमारे उद्योग के भविष्य के लिए इसके बहुत बड़े और गंभीर निहितार्थ हैं,” इनामुल हक खान, वरिष्ठ उपाध्यक्ष, बांग्लादेश गारमेंट मैन्युफैक्चरर्स एंड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन (BGMEA) ने प्रथम आलो से कहा।

ऐतिहासिक संदर्भ: ट्रम्प का टैरिफ युग

इस जल्दबाजी के पीछे की गंभीरता को समझने के लिए अप्रैल 2025 पर नजर डालना जरूरी है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने वैश्विक “पारस्परिक टैरिफ” व्यवस्था लागू की थी। बांग्लादेश पर शुरू में अपने निर्यात पर 37% का दंडात्मक शुल्क लगाया गया था। हालांकि, गहन पैरवी और बातचीत के कई दौरों के बाद अगस्त 2025 तक इस दर को घटाकर 20% कर दिया गया था।

लेकिन “भारत कारक” ने ढाका के पूरे गणित को बदल दिया है। भारत द्वारा 18% की दर सुरक्षित कर लेने से, बांग्लादेशी उत्पादों—बुनियादी टी-शर्ट से लेकर उच्च-स्तरीय निटवियर तक—को अचानक भारतीय प्रतिस्पर्धा के सामने 2% के मूल्य नुकसान का सामना करना पड़ा। कपड़ा निर्यात की दुनिया में, जहाँ मुनाफा बहुत कम मार्जिन पर निर्भर होता है, इस तरह का अंतर वैश्विक खरीदारों को भारतीय आपूर्तिकर्ताओं की ओर मोड़ने के लिए पर्याप्त है।

वाशिंगटन की मांगें: परिधानों से परे

जबकि बांग्लादेश कम शुल्क की मांग कर रहा है, अमेरिका ने इसके बदले “बाय अमेरिकन” (अमेरिकी उत्पाद खरीदें) आवश्यकताओं की एक लंबी सूची पेश की है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि यह सौदा केवल व्यापार शुल्क के बारे में नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र में चीनी प्रभाव को कम करने के लिए वाशिंगटन की एक रणनीतिक चाल भी है।

कथित तौर पर इस सौदे की प्रमुख शर्तों में शामिल हैं:

  • सैन्य खरीद: बांग्लादेश सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण के लिए अमेरिकी रक्षा उपकरणों की खरीद में वृद्धि और चीन पर निर्भरता कम करना।

  • कृषि पहुंच: अमेरिकी गेहूं, सोयाबीन, मक्का और कपास के लिए बांग्लादेशी बाजार को आसान बनाना। एक अनूठे “कपास-के-बदले-परिधान” (cotton-for-garments) विनिमय पर चर्चा हो रही है, जहाँ अमेरिकी कपास से बने कपड़ों को अमेरिका में शुल्क-मुक्त प्रवेश मिल सकता है।

  • ऑटोमोबाइल और मानक: अमेरिकी वाहनों के लिए अतिरिक्त निरीक्षण को हटाना और बिना किसी बाधा के अमेरिकी सुरक्षा मानकों को स्वीकार करना।

  • ई-कॉमर्स पर रोक: डिजिटल सेवाओं और सीमा पार ई-कॉमर्स पर भविष्य में किसी भी प्रकार का टैरिफ लगाने पर स्थायी प्रतिबंध।

भू-राजनीतिक दांव और घरेलू तनाव

12 फरवरी के चुनाव अगस्त 2024 में एक जन विद्रोह के बाद शेख हसीना की बेदखली के बाद होने वाले पहले चुनाव हैं। जैसे ही अंतरिम सरकार विदा होने की तैयारी कर रही है, सेंटर फॉर पॉलिसी डायलॉग (CPD) के प्रतिष्ठित फेलो देबप्रिया भट्टाचार्य जैसे विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यह सौदा आने वाली निर्वाचित सरकार के नीतिगत विकल्पों को “अनावश्यक रूप से सीमित” कर सकता है।

भू-राजनीतिक दृष्टि से, यह समझौता एक बड़े बदलाव का संकेत है। चीनी आयात को कम करने और वाशिंगटन के मानकों के साथ जुड़ने की प्रतिबद्धता जताकर, बांग्लादेश पश्चिम के साथ सहयोग के एक नए युग की शुरुआत कर रहा है। हालांकि, घरेलू बाजार “छिपी हुई लागतों” को लेकर डरा हुआ है, जिसमें सख्त बौद्धिक संपदा कानूनों के कारण जीवन रक्षक दवाओं की कीमतों में संभावित वृद्धि भी शामिल है।

जैसे ही वाणिज्य सचिव महबूबुर रहमान और उनका प्रतिनिधिमंडल वाशिंगटन में हस्ताक्षर के लिए तैयार हो रहा है, पूरा बांग्लादेश अपनी सांसें थामे हुए है। कम टैरिफ हासिल करना परिधान क्षेत्र के लिए एक जीवनदान हो सकता है, लेकिन इसके साथ जुड़ी “गुप्त” शर्तें आने वाले दशकों के लिए बांग्लादेश की आर्थिक संप्रभुता का नया चेहरा तय करेंगी।

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