उत्तरप्रदेश

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा- किसी भी निवेशक को चार चीजें सुरक्षा, जमीन, मानव हस्तक्षेप रहित इंसेंटिव और मैनपावर चाहिए

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कहना है कि किसी भी निवेशक को चार चीजें सुरक्षा, जमीन, मानव हस्तक्षेप रहित इंसेंटिव और मैनपावर चाहिए। यूपी में ये चारों ही सुविधाएं सहजता से उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा है कि प्रदेश सरकार को इन्वेस्टर्स समिट को लेकर देश-दुनिया के निवेशकों से बहुत ही उत्साहवर्धक समर्थन मिला है। सरकार इन प्रस्तावों को जमीन पर उतारकर राज्य के सर्वांगीण और संतुलित विकास को गति देगी। उन्होंने प्रदेश के आगामी बजट सत्र के दौरान उठाए जाने वाले किसी भी मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार होने की बात करते हुए विपक्ष पर जाति व धर्म की राजनीति करने का आरोप लगाया। साथ ही पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव को पद्मविभूषण सम्मान दिए जाने पर सपा मुखिया अखिलेश यादव की चुप्पी पर भी राय व्यक्त की।

मोदी 2.0 का आखिरी पूर्ण बजट आ गया है। इस बजट में यूपी के लिए   क्या-क्या बड़ी संभावनाएं देख रहे हैं?
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के विजन को ध्यान में रखकर बजट पेश किया है। यह न सिर्फ सर्वस्पर्शी है, बल्कि सर्व समावेशी भी है। विजन के साथ में प्रस्तुत एक आधुनिक भारत का बजट है, जो देश की आगामी 25 वर्षों की कार्ययोजना को देश के सामने प्रस्तुत करता है। देश की सबसे बड़ी आबादी का राज्य होने की वजह से केंद्र के बजट का सर्वाधिक लाभ यूपी के लोगों को प्राप्त होगा। इसमें देश के 80 करोड़ लोगों को, गरीब कल्याण अन्न योजना का लाभ तो मिल ही रहा है, मध्य वर्ग को आयकर में छूट का लाभ भी प्राप्त होगा। इसी तरह इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट की बात करें तो रेलवे के लिए 2013-14 की तुलना में नौ गुना वृद्धि की गई है। ऐसे ही हेल्थ सेक्टर में वन डिस्ट्रिक्ट-वन मेडिकल कॉलेज के बाद वन मेडिकल कॉलेज-वन नर्सिंग कॉलेज के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में एक नया विजन देखने को मिला है। औद्योगिक विकास के लिए एमएसएमई को सबसे अधिक समर्थन की जरूरत होती है। उसके लिए बड़े प्रावधान किए गए हैं। इसी तरह नए भारत को तकनीकी तौर पर सक्षम बना सकें, इसकी पूरी दृष्टि केंद्रीय बजट में पेश की गई है।

ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में बड़े पैमाने पर निवेश प्रस्ताव मिल रहे हैं। सरकार इस बार ऐसा क्या नया कर रही है, जिससे यूपी में एमओयू करने वाला कोई भी निवेशक बिना निवेश न लौटे?
फरवरी 2018 के अनुभव हमारे सामने थे। हमने यूपी में निवेश को बल देने से संबंधित सभी सेक्टर की निवेश फ्रेंडली और रोजगारपरक नीतियों को बनाकर लागू कर दिया है। 25 सेक्टर की नीतियां हम लागू कर चुके हैं। निवेशक तीन-चार चीजों को लेकर हमेशा सशंकित   रहता है। 

पहला, सुरक्षा। आज यूपी के सामने सुरक्षा का कोई मुद्दा नहीं है। कानून-व्यवस्था व बदले माहौल के जरिए यूपी आज देश के सुरक्षित राज्यों में से एक है। 
दूसरी चिंता लैंड बैंक की रहती है। उद्योग कहीं न कहीं जमीन पर ही लगने हैं। हमारे पास पर्याप्त मात्रा में लैंड बैंक है। 
तीसरी बात, किसी भी निवेशक को अपने निवेश के लिए कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़े। हमने इसकी भी पुख्ता व्यवस्था की है।

निवेशकों के लिए निवेश सारथी पोर्टल पर आवेदन की सुविधा दी गई है। निवेश सारथी की मॉनीटरिंग मुख्यमंत्री कार्यालय कर रहा है। निवेश सारथी संबंधित निवेशक को उस पॉलिसी तक पहुंचाता है, जिसमें उसे निवेश करना है। यह उसे संबंधित सेक्टर में एमओयू के लिए तैयार करता है। एमओयू के लिए जैसे ही तैयार हुआ, निवेश मित्र पोर्टल पर आ गया। निवेश मित्र पोर्टल पर आने के बाद जैसे ही एमओयू होगा, यह पोर्टल संबंधित निवेश को जमीन पर उतारने की कार्यवाही सुनिश्चित करेगा। प्रोजेक्ट लगने के बाद निवेशक को इंसेंटिव मिलना चाहिए। इसके लिए भी एक सॉफ्टवेयर डेवलप किया गया है। निवेश सारथी, निवेश मित्र व इंसेंटिव मॉनीटरिंग की पूरी प्रक्रिया मानव हस्तक्षेप रहित है। निवेश मित्र पोर्टल पूरे देश में निवेशकों को सबसे अधिक सहूलियत देने वाला पोर्टल है। 350 से अधिक सेवाएं निवेशकों को इस पोर्टल के जरिए उपलब्ध करवा रहे हैं। चौथी बात मैनपावर को लेकर है। देश की सबसे बड़ी आबादी वाला राज्य है तो सबसे ज्यादा युवा भी हमारे पास हैं। ‘स्किल व अनस्किल्ड’ मैनपावर भी है। इन्हें नौकरी चाहिए। सरकार इसके लिए भी इंसेंटिव देकर इस कार्यवाही को आगे बढ़ा रही है।

पूरा सिस्टम ऑनलाइन होने के बावजूद कई निवेशक स्टांप रजिस्ट्रेशन व राजस्व विभाग से जुड़ी कार्यवाही को लेकर सवाल करते मिलते हैं?
राजस्व संहिता में हमने काफी परिवर्तन कर दिया है। हमने यह व्यवस्था कर दी है कि अब निवेशक को विभाग में जाने की जरूरत ही नहीं रह गई। वह निवेश मित्र पोर्टल पर अपना आवेदन डाले। पोर्टल से तय समय के भीतर निवेशक से आवश्यक जानकारी मांगी जाएगी। जो भी जानकारी मांगी जाए, वह उसका समय से जवाब दे दे। कहीं मानवीय हस्तक्षेप नहीं है। मान लीजिए कि निवेशक को 20 एकड़ जमीन की आवश्यकता है। यदि उसने बिना अनुमति 20 एकड़ जमीन ले ली, तो हो सकता है कि राजस्व विभाग का कोई कर्मी कहे कि निवेशक ने 12.5 एकड़ से अधिक जमीन खरीदने के लिए अनुमति नहीं ली। मगर, अब राजस्व संहिता में यह व्यवस्था कर दी गई है कि किसी औद्योगिक इकाई की स्थापना, विश्वविद्यालय या संस्थान के लिए यदि 20 एकड़ जमीन ले ली गई है तो उसकी अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है। आवश्यकता यही है कि वह इस प्रक्रिया को निवेश मित्र पोर्टल के जरिए आगे बढ़ाए। हम जो सुविधाएं दे रहे हैं, इसे निवेशकों को बताने की व्यवस्था कर रहे हैं। स्टांप व रजिस्ट्रेशन से जुड़ी समस्या भी अब नहीं रही। पॉलिसी के दायरे में जो भी छूट मिलनी है वह ऑनलाइन मिल जाएगी। अब इस तरह की कोई समस्या नहीं रही। हर पॉलिसी ऑनलाइन उपलब्ध करा दी गई है। पॉलिसी से जुड़े लाभ पाने के लिए कहीं भी भटकने की जरूरत नहीं होगी।

युवाओं में एक धारणा बन रही है कि सरकारी नौकरियों की जगह प्राइवेट नौकरियों के सृजन पर फोकस बढ़ाया जा रहा है। यूपी जैसे राज्य के युवाओं में अब भी सरकारी नौकरियों का ही आकर्षण है? बड़ी संख्या में विभागों में पद रिक्त बताए जा रहे हैं?
यह धारणा सही नहीं है। हमारी सरकार ने पिछले साढ़े पांच साल के दौरान पांच लाख से अधिक सरकारी भर्तियां कर ली हैं। हमारे पास सबसे ज्यादा शिक्षा और गृह विभाग में रिक्तियां थीं। 1.60 लाख पुलिस की भर्ती हमने कर ली है। जो लोग रिटायर हो रहे हैं या नई आवश्यकता के लिए नए पद सृजित हो रहे हैं, उनकी भर्ती की जरूरत पड़ रही है। इस समय इस तरह के करीब 35 हजार पदों पर भर्ती की प्रक्रिया चल रही है। दूसरी बड़ी रिक्तियां शिक्षकों की थी। बेसिक व माध्यमिक को मिलाकर करीब 1.55 लाख शिक्षकों की भर्ती पूरी कर ली गई है। प्रदेश में करीब 6 लाख शिक्षक हैं। हर वर्ष 5000-7000 शिक्षक रिटायर हो रहे हैं। इनकी रिक्त पदों की भर्ती प्रक्रिया को भी समय से आगे बढ़ाया जा रहा है।

बेसिक शिक्षा विभाग में जूनियर हाईस्कूल हैं। जूनियर स्कूलों में विज्ञान व गणित के शिक्षकों की भर्ती होती है और ये भर्ती प्राइमरी में पढ़ाने वाले शिक्षकों की पदोन्नति से होती है। किन्हीं वजहों से पिछले कई वर्षों से यह पदोन्नति न होने से बड़ी संख्या में जूनियर स्कूलों के बच्चे विज्ञान व गणित विषय की पढ़ाई से वंचित हो रहे हैं। इसका उनकी आगे की पढ़ाई पर असर पड़ रहा है। सरकार क्या कदम उठाएगी?
सरकार ने बेसिक, माध्यमिक व उच्च शिक्षा में यह व्यवस्था दी है कि समय से अधियाचन भेजकर नियुक्ति प्रक्रिया पूरी की जाए। दूसरा, जहां नियुक्ति की प्रक्रिया में देरी है वहां तब तक एक निश्चित मानदेय पर सेवानिवृत्त शिक्षक से पठन-पाठन का कार्यक्रम  बढ़ाएं। तीसरा, यदि कोई सेवानिवृत्त शिक्षक नहीं मिल रहा है तो किसी नए व्यक्ति को उसी मानदेय पर रखकर पठन-पाठन सुनिश्चित  कराएं। बच्चों की पढ़ाई को बाधित नहीं होने देंगे। यही वजह है कि बेसिक व माध्यमिक में शिक्षा के स्तर में पिछले पांच वर्षों में अच्छे परिणाम सामने आए हैं। इसको और बेहतर करने की गुंजाइश है। उस ओर प्रयास करेंगे।

जी-20 की कई बैठकें यूपी में होने वाली हैं।   इस अवसर का यूपी किस तरह लाभ उठाने का   प्रयास करने जा रहा है?
यह हमारे लिए एक बड़ा अवसर है। हम पीएम मोदी के आभारी हैं, जिन्होंने जी-20 की 11 बैठकें यूपी के चार महानगरों में उपलब्ध कराईं हैं। इससे भारत व यूपी को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने का अवसर प्राप्त होगा। हम इन कार्यक्रमों को यूपी में बहुत अच्छे तरीके से आगे बढ़ाने जा रहे हैं। पहली बैठक 9-12 फरवरी तक आगरा में होने जा रही है। दूसरी बैठक 13 से 15 फरवरी तक लखनऊ में होगी। प्रदेश में बैठकें अगस्त तक होती रहेंगी। यूपी में इन बैठकों की पूरी तैयारी है। दुनिया के 20 बड़े देश व नौ अन्य मित्र देशों के प्रतिनिधि यूपी को नजदीक से देखेंगे। इसके लिए सारी व्यवस्था केंद्र व राज्य मिलकर कर रहे हैं।

किसानों की लागत कम, आय दोगुनी करेंगे
तमाम प्रयासों के बावजूद किसानों की लागत व आय के बीच बड़ा अंतर बना हुआ है। उनकी आय  वृद्धि के प्रयास उम्मीद के हिसाब से नतीजे नहीं दे पा रहे हैं। किसानों की तकनीक से जुड़ने की झिझक भी नहीं दूर हो पा रही है?
किसानों की आमदनी को बढ़ाने के लिए आवश्यक है कि लागत कम करें और उत्पादकता को बढ़ाएं। लागत को कम करने के लिए तकनीक का उपयोग किया जाना आवश्यक है। सरकार इस ओर ध्यान दे रही है। सरकार ने कृषक उत्पादकता समूह गठित करने की पहल की है। दरअसल, यूपी में छोटी जोत के किसान हैं। छोटी जोत के किसान कृषि यंत्रों का इस्तेमाल कर नहीं कर सकते। यांत्रिक तरीके से खेती करने के लिए बड़ी जोत चाहिए। 15 हजार, 20 हजार एकड़ की जोत अगर एक स्थान पर मिलती है तब मशीनीकृत खेती हो सकती है। तभी अच्छा लाभ प्राप्त हो सकता है। अभी 90 फीसदी किसान छोटी जोत के हैं। इन परिस्थितियों में आवश्यक है कि अपने लोगों को प्रशिक्षित करें, जागरूक करें। इसी को ध्यान में रखकर एफपीओ गठित किए जा रहे हैं। इन एफपीओ के माध्यम से ये कार्य आगे बढ़ा रहे हैं। इसके बेहतर नतीजे सामने आ रहे हैं।

निराश्रित गोवंशों के लिए तीन योजनाएं
प्रदेश में छुट्टा जानवरों की समस्या अब भी बनी हुई है। इस समस्या के समाधान के लिए बनाए गए तंत्र में समन्वय की कमी की बात सामने आ रही है?
इस मुद्दे पर विचार के लिए दो बातें समझनी चाहिए। पहला, निराश्रित गोवंश के लिए सरकार तीन योजनाएं संचालित कर रही है। निराश्रित गोवंश को गो आश्रय स्थल में रखते हैं। ऐसे आठ लाख गोवंश को आश्रय स्थलों में रखकर उनकी सेवा की जा रही है। दूसरा, सहभागिता योजना। इसमें कोई भी किसान निराश्रित आश्रय स्थल से गोवंश लाकर देखभाल करेगा तो उसे प्रति गोवंश 900 रुपये प्रतिमाह दिया जाएगा। इस योजना के अंतर्गत लगभग एक लाख गोवंश किसानों के पास है। तीसरा, कुपोषित परिवारों को एक दुधारू गाय देते हैं। ऐसे परिवारों को भी 900 रुपये महीने देते हैं। दूसरा, यह भी समझना चाहिए कि एक भी गाय सरकार की नहीं है। सभी गायें किसानों की ही हैं। इसके लिए सरकार उन्हें संबल देने के लिए एक व्यवस्था दे रही है। इस स्थिति को और बेहतर करने के लिए एक विशेष पहल होने जा रही है। सरकार किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ने जा रही है। खाद, रसायन व कीटनाशक से किसानों को मुक्ति मिलेगी। इससे लागत को कम करने में मदद मिलेगी, जिसका फायदा किसानों को होगा। इसी तरह गोवंश की नस्ल सुधार का काम कर रहे हैं। नए प्रयास प्रारंभ हुए हैं। यदि ये दोनों नए प्रयास प्रभावी ढंग से लागू हो जाते हैं तो काफी हद तक निराश्रित गोवंश की समस्या का समाधान कर लेंगे।

लोकसभा चुनाव की तैयारी शुरू हो गई है। विपक्ष तीसरी बार एकजुट हो रहा है…
विपक्ष एकजुटता के लिए हाथ पैर मारेगा ही, यही उनका काम है। लेकिन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा यूपी में बेहतरीन प्रदर्शन करेगी। इस दिशा में हमारी तैयारी हो चुकी है। हम उसके लिए कार्य कर रहे हैं।

बिहार में जातीय जनगणना की पहल के बाद यूपी में विपक्षी दलों ने भी इस ओर आवाज उठानी शुरू की है? 
प्रदेश सरकार का स्टैंड स्पष्ट है। भारत जनगणना आयोग जो स्टैंड लेगा, वही स्टैंड यूपी का रहेगा। हमारा सवाल ये है कि विपक्ष को ये मुद्दे चुनाव के समय ही क्यों याद आते हैं? वजह साफ है कि विकास, लोक कल्याण के मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए वह हमेशा जाति-मत-मजहब का सहारा लेती है। लेकिन, उनकी शासनकाल की कुव्यवस्था व कुशासन को देश, दुनिया व यूपी के लोगों ने देखा है। ऐसे में कोई सफल नहीं होने वाला है।

समान नागरिक संहिता पर विधि आयोग कर रहा अध्ययन
एक महत्वपूर्ण विषय समान नागरिक संहिता का है। इस मुद्दे पर योगी सरकार का क्या रुख है?
राज्य सरकार ने इस ओर कार्यवाही शुरू की है। राज्य विधि आयोग इस प्रकरण का अध्ययन कर रहा है। आयोग अपनी रिपोर्ट देगा और देश जैसे ही इस ओर कोई सहमति बनाएगा, यूपी उसी आधार पर अपनी कार्यवाही करेगा।

केंद्र सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव को पद्म विभूषण सम्मान दिया है। अखिलेश यादव ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। इसे किस रूप में देखते हैं?
यह मुद्दे राजनीति से परे है। मुलायम सिंह जी    आज नहीं हैं। यह केंद्र सरकार का बड़प्पन है कि मुलायम सिंह की लोक सेवाओं को ध्यान में रखकर पद्म सम्मान से सम्मानित किया। समाजवादी पार्टी और पूर्व सीएम अखिलेश यादव को प्रधानमंत्री और केंद्र सरकार के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करना चाहिए।

अखिलेश यादव ने हाल में कहा कि वह पिछड़ों-दलितों को शूद्र माने जाने वाला मुद्दा सदन में उठाएंगे? 
हम इस मुद्दे पर भी चर्चा के लिए तैयार हैं। दरअसल, सपा के पास जब कोई मुद्दा नहीं रहता है तब वह जाति का मुद्दा उठाती है। जाति व मजहब के अलावा उनके पास कोई दूसरा मुद्दा नहीं है। सरकार हर मुद्दा पर चर्चा के लिए तैयार है और उसका जवाब दे देगी।

आपकी सरकार का लगातार सातवां व दूसरे कार्यकाल का दूसरा बजट आने वाला है। 2023-24 के बजट का फोकस क्या होगा?
यूपी देश की आबादी का सबसे बड़ा राज्य है। अभी केंद्रीय बजट आया है। हमारी टीमें केंद्रीय बजट का अध्ययन कर रही हैं। इसी बजट को ध्यान में रखकर राज्य का ऐसा बजट सामने आएगा जो 25 करोड़ लोगों के जीवन में परिवर्तन का कारक तो बनेगा ही, पीएम ने यूपी के लिए 10 खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था का जो विजन दिया है, उसे पूरा करने में सफल होगा।

मैनपुरी चुनाव के बाद अखिलेश यादव और शिवपाल यादव एक साथ आ गए हैं? भाजपा इसे किस रूप में लेती है?
विधानसभा चुनाव भी एकजुट होकर ही लड़े थे। अलग थे ही नहीं। दोनों के एक होने से भी भाजपा पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य के भाजपा में आने और फिर जाने के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच से यह सवाल आ रहा है कि दूसरे दलों से आने वाले लोगों को पार्टी में लेने का कोई स्क्रीनिंग सिस्टम भी है या नहीं। क्या कहना चाहेंगे?
भाजपा एक लोकतांत्रिक दल है। जो पार्टी के मूल्यों व आदर्शों पर विश्वास करता है, उसे पार्टी जनसेवा का अवसर उपलब्ध कराती है। भाजपा जाति-मत व मजहब देखकर नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति उसकी निष्ठा और पार्टी के मूल्यों व आदर्शों पर विश्वास देखती है। भाजपा सबका साथ, सबके विकास की बात करती है। पार्टी में आने के बाद किसी के जाने में कमी भाजपा की नहीं है। यह कमी उन लोगों की है, जो स्वयं को संभाल नहीं पाते हैं।

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