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उप्र सरकार अपने खजाने से करे कृषि ऋण माफः केंद्र

उप्र सरकार अपने खजाने से करे कृषि ऋण माफः केंद्र

किसानों के सशक्तिकरण की प्रतिबद्धता व्यक्त करते हुए कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह ने आज कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार अगर अपने राज खजाने से किसानों के ब्याज या कर्ज का भार उठाती है तो उन्हें खुशी होगी। लोकसभा में कृषि मंत्री ने उत्तर प्रदेश समेत देश के विभिन्न राज्यों में किसानों की कर्ज माफी की कांग्रेस सहित कुछ विपक्षी दलों की मांग पर कहा कि उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार ने अपने घोषणापत्र में लघु एवं सीमांत किसानों की ऋण माफी की बात कही थी। ”कोई राज्य सरकार अगर अपने राज खजाने से ब्याज या ऋण का भार उठाती है, तो उन्हें खुशी होगी।’’

उन्होंने कहा कि तमिलनाडु समेत विभिन्न राज्यों को किसान कल्याण योजनाओं, लघु सिंचाई परियोजनाओं के लिए पैसा दिया जाता है लेकिन राज्य इन्हें पूरा खर्च नहीं कर रहे हैं। राधा मोहन सिंह ने कहा कि देश के विभिन्न क्षेत्रों में प्राकृतिक आपदा की स्थिति रही है और राज्यों को राज्य आपदा कोष में पैसा दिया जाता है। कांग्रेस नीत संप्रग सरकार के दौरान पांच वर्षों में राज्य आपदा कोष में 24 हजार करोड़ रूपये दिये गए थे और मोदी सरकार आने के बाद इसे बढ़ाकर 47 हजार करोड़ रूपये कर दिया गया। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु को राज्य आपदा कोष में संप्रग सरकार के 5 वर्षों में 1082 करोड़ रूपये दिये गए जो मोदी सरकार के दौरान 5 वर्षों के लिए बढ़ाकर 3,000 करोड़ रूपये कर दिये गए। कृषि मंत्री ने कहा कि इसके अलावा राष्ट्रीय आपदा कोष से भी राज्यों को मदद दी जाती है। 2010.11, 2011.12, 2012.13 और 2013.14 के दौरान चार वर्षों में राज्यों को राष्ट्रीय आपदा कोष से 12 हजार करोड़ रूपए दिये गए जबकि मांग 92 हजार करोड़ रूपये थी। उन्होंने कहा कि 2014.15 में कोष से राज्यों को 9 हजार करोड़ रूपये और 2015.16 में 15 हजार करोड़ रूपये दिये गए। मंत्री के जवाब से असंतुष्ट कांग्रेस सदस्यों ने सदन से वाकआउट किया।

कृषि मंत्री सिंह ने कहा कि जहां तक तमिलनाडु के किसानों का सवाल है, वित्त मंत्री, वाणिज्य मंत्री, गृह मंत्री समेत विभिन्न मंत्रियों से इस बारे में प्रदेश सरकार ने चर्चा की है। कांग्रेस सदस्यों द्वारा कर्ज माफी का विषय उठाने पर राधा मोहन सिंह ने कहा कि पहले किसानों को ऋण पर 9 प्रतिशत ब्याज देना पड़ता था और जब पूर्व की राजग सरकार में राजनाथ सिंह मंत्री थे तब इसे 2 प्रतिशत कम किया गया। इसमें से किसानों को 4 प्रतिशत देना पड़ता है। कई राज्य अपने राज खजाने से ब्याज का भार उठाते हैं।

कृषि मंत्री ने कहा कि पूर्ववर्ती संप्रग सरकार ने 2008 में कर्ज माफी की घोषणा की थी। 2005 में कृषि एवं कृषि कार्य से जुड़े श्रमिकों की आत्महत्या के 15 प्रतिशत मामले थे जो 2008 में 13 प्रतिशत थे। 2009 में यह बढ़कर 13.7 प्रतिशत हो गए। और अभी यह दर 9.4 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि सरकार जितनी भी योजना चला रही है, उसका ध्येय किसानों का सशक्तिकरण है और हम इसके लिए प्रतिबद्ध हैं।

इससे पहले कांग्रेस के ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इस विषय को उठाते हुए कहा कि पूर्ववर्ती संप्रग सरकार ने 71 हजार करोड़ रूपये की ऋण माफी योजना लाई थी जिससे 3.5 करोड़ किसानों को फायदा हुआ। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में भाजपा ने ऋण माफी की बात कही थी लेकिन कोई पहल नहीं हुई। तमिलनाडु के किसान दिल्ली में धरना दे रहे हैं। महाराष्ट्र में किसान अत्महत्या कर रहे हैं। किसान परेशान है लेकिन उसकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। सिंधिया ने कहा कि हम मांग करते हैं कि किसानों की ऋण माफी योजना लाई जाए।

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