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जेलों से अपराध संचालन पर जेलर होंगे जिम्मेदार!

जेलों से अपराध संचालन पर जेलर होंगे जिम्मेदार!

देहरादून: जेलों में बंद अपराधियों के माध्यम से अपराध का संचालन अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ऐसे मामलों में सीधे तौर पर जेलर जिम्मेदार होंगे। गृह विभाग की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि जेलों से अपराध के संचालन पर रोक के लिए जरूरी कदम उठाए जाएं। इसके साथ ही उन्होंने अवैध खनन पर रोक के लिए पुलिस, वन विभाग और जिला प्रशासन को संयुक्त टीम गठित कर काम करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सचिवालय में गृह विभाग की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में लगातार बाहरी अपराधियों की धमक बढ़ रही है। राज्य को किसी भी कीमत पर अपराधियों की शरणस्थली नहीं बनने दिया जाएगा। पुलिस कुख्यात अपराधियों के साथ सख्ती से पेश आए। जेलों से संचालित हो रहे अपराधों पर सख्ती से अंकुश लगाया जाए।

ऐसे मामलों में सीधे तौर पर जेलरों को जिम्मेदार माना जाएगा। उन्होंने पुलिस महानिदेशक को निर्देश दिए कि राज्य में बेहतर कानून व्यवस्था के लिए हर संभव प्रयास किए जाएं।

एसडीआरएफ की समीक्षा के दौरान उन्होंने आपदा में खोज एवं बचाव के लिए रात्रिकालीन उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इसके साथ ही सेटेलाइट फोन और दूरस्थ क्षेत्रों में संचार की मजबूत व्यवस्था की जाए। चारधाम यात्रा को देखते हुए उन्होंने पुलिस विभाग को अलर्ट रहने को कहा।

इसके साथ ही राज्य में बढ़ रहे नशे के धंधे पर रोक लगाने के लिए भी पुलिस को व्यापक अभियान चलाने के निर्देश उन्होंने दिए। मुख्यमंत्री ने पुलिस विभाग के लिए जरूरी भवनों के निर्माण और नरेंद्र नगर में बन रहे पुलिस ट्रेनिंग कॉलेज के लिए बजट प्रस्ताव तैयार करने को कहा।

बैठक में पुलिस महानिदेशक एमए गणपति ने जानकारी दी कि राज्य में कुल 26000 कार्मिक तैनात हैं। इनमें 59 आईपीएस, 98 पीपीएस, 273 निरीक्षक, 1775 उप निरीक्षक, 1697 हेड कांस्टेबल, 175469 कांस्टेबल तैनात हैं। इनके अलावा पीएस की तीन वाहिनियां, आईआरबी को दी वाहिनियां हैं।

उन्होंने बताया कि एक जनवरी से 31 मार्च तक हत्या, लूट, डकैती, चोरी आदि के कुल 487 मामले पंजीकृत किए गए। इनमें से 280 का खुलासा किया जा चुका है। बैठक में प्रमुख सचिव उमाकांत पंवार आदि मौजूद थे।

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